फैमिली ऑफ ठाकुरगंज फिल्म रिव्यू

कहानी है ठाकुरगंज में रहनेवाले दो भाइयों नन्नू (जिमी शेरगिल) और मन्नू (नंदीश संधू) की। पिता की मौत के बाद मां (सुप्रिया पाठक) और भाई मन्नू की जिम्मेदारी नन्नू को छोटे शहर ठाकुरगंज का बाहुबली उर्फ भैयाजी बनने पर मजबूर कर देती है, जबकि छोटा भाई नन्नू पढ़-लिखकर प्रफेसर बन जाता है और सच्चाई का रास्ता अख्तियार करता है।

दोनों भाइयों की विचारधारा और जीवन शैली के टकराव के बीच नन्नू की मां और पत्नी शरबती (माही गिल) रंगबाजी में नन्नू का साथ देते हैं। यहां तक कि उनकी नन्ही बेटी भी स्कूल में दंबगई करने से बाज नहीं आती। कुल मिलाकर ठाकुरगंज की यह रंगबाज फैमिली इलाके में दबदबा कायम रखने के साथ-साथ दान-धर्म के काम भी करती है। नन्नू को इलाके के बाहुबली बाबा भंडारी (सौरभ शुक्ला) का वरद हस्त प्राप्त है और वो उसकी छत्रछाया में अपनी रंगबाजी के कामों को अंजाम देता है। मगर फिर एक दिन नन्नू के की ईमानदारी वाली सोच मन्नू को बदलकर रख देती है और उसे उसकी कीमत चुकानी पड़ती है।

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