वॉर मूवी रिव्यू

वॉर मूवी रिव्यू
कलाकाररितिक रोशन,टाइगर श्रॉफ,वाणी कपूर,आशुतोष राणा,दिशिता सहगलनिर्देशकसिद्दार्थ आनंदमूवी टाइपAction,Thrillerअवधि2 घंटा 34 मिनट
ऐक्शन से लबरेज सप्ताह कहना गलत न होगा। इस सप्ताह दर्शकों को दो बड़े बजट वाली ऐक्शन फिल्मों को देखने का मौका मिल रहा है। तकरीबन ढाई सौ करोड़ की ‘सई रा नरसिम्हा रेड्डी’ के साथ करीब दो सौ करोड़ के बजट वाली ऐक्शन मूवी ‘वॉर’ भी प्रदर्शित हुई है। एक ही फ्रेम में जब रितिक रोशन और टाइगर श्रॉफ जैसे दो हैंडसम मसल मैन हों, तो जांबाजी के साथ ऐक्शन लेकर उम्मीदें आसमान छूना लाजमी है।

इसमें कोई शक नहीं कि रितिक और टाइगर ने ऐक्शन के मामले में अब तक का अपना बेस्ट दिया है। हां अगर कहानी दमदार होती,तो किसी भी हॉलिवुड की फिल्म को टक्कर देने में समर्थ रहती।
कहानी है सीक्रेट सोल्जर कबीर (रितिक रोशन) की, जो देश को अपनी जान से भी ज्यादा मानता है। अपने सिर से अपने पिता द्वारा की गई गद्दारी के पाप को धोने के लिए खालिद (टाइगर श्रॉफ) कबीर के अंडर ट्रेनिंग लेकर देशभक्ति की मिसाल कायम करना चाहता है। उसकी इस पहल में उसका चीफ (आशुतोष राणा ) और उसकी अम्मी (सोनी राजदान) उसे हिम्मत देते हैं। कबीर उसे अपने एक सीक्रेट मिशन में शामिल कर लेता है, जहां उन्हें देश के दुश्मन इल्यासी को जिंदा पकड़ना है। अपनी ही टीम के एक सिपाही के विश्वासघात के बाद कबीर का मिशन फेल हो जाता है और उसके बाद कबीर इल्यासी को पकड़ने के लिए दूसरा जाल बुनता है।वह डांसर नैना (वाणी कपूर) को सिविलियन असेट बनाकर अपने मिशन में शामिल करता है, मगर तभी कुछ ऐसा घटित होता है कि कबीर अपने देश के अधिकारियों का सिलसिलेवार कत्ल करने लगता है। कल तक आर्मी के लिए नायक रहे कबीर की ये करतूत उसे खलनायक बना देती है। देश पर जान कुर्बान करने पर आमादा कबीर अचानक देश का दुश्मन क्यों बन बैठा? इसका पता लगाने के लिए खालिद को नियुक्त किया जाता है। खालिद जब कबीर की जांच-पड़ताल करता है, तो कई ऐसे राज फाश होते हैं, जिनके बारे में किसी ने कल्पना भी नहीं की होती।

निर्देशक सिद्धार्थ आनंद की फिल्म ऐक्शन के मामले में जितनी रिच है, काश कॉन्टेंट के मामले में भी उतनी ही समृद्ध होती। फिल्म में रितिक और टाइगर को ईक्वल स्पेस देकर उनके मसल्स और ऐक्शन प्रदर्शन के चक्कर में सिद्दार्थ ने कहानी और अन्य पात्रों को उपेक्षित कर दिया है। हां, उन्होंने सेकंड हाफ में कई टर्न और ट्विस्ट रखें हैं, जो कहानी को रफ्तार देते हैं, मगर वे कुछ भी नया परोसने में कामयाब नहीं रहे हैं। कहानी का केंद्रबिंदु इस्लामिक आतंकवाद है, जो हम इससे पहले भी देशभक्ति वाली फिल्मों में देख चुके हैं। हाई ऑक्टेन स्टंट्स और पूरी दुनिया भर के केरल, मॉल्टा, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया,आर्कटिक सर्कल जैसे अनदेखे लोकेशंस फिल्म का प्लस पॉइंट हैं।

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